मुलाकात🪞
मन की हालत आज हल्की हुई है,
सदियों की कमी शायद आज पूरी हुई है।
ना चाहकर भी आज उस राह पर रुख मोड़ना ही पड़ा,
जिससे बचकर भागने के लिए बोला करते थे झूठ हम बड़ा।
राह से खबर मिली आज हमे यह,
के आए थे राही कई याहा।
आज हम भी उन राहियो की सूची में शामिल हुए,
आज हम भी उन भटके हुए मुसाफिरों से एकमेल हुए।
मुसाफिरों की उस टोली में से दिखा कोई अलबेला,
ना जान ना पहचान पर फिर भी वो मुखड़ा लगा अपनेसा।
रातें साथ काटी हमने कई उस दौर में,
बाते तो मत पूछो कितनी बाटी हमने उस दौर में।
खुश थे सब, मगन थे सब अपने साथी के साथ,
लेकिन नमी थी आखों में के अब कुछ ही दिन है ये बात और ये साथ।
उन पलों को हस के जीए हम,
आगे की ना सोचकर आज में जीए हम।
जाते जाते वो कह गए हमसे;
मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी,
किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।
प्रीत की डोर बंधते वक्त नही लगा ज़रा भी,
लेकिन उस डोर को टूटने के लिए लग गई पूरी उम्र ही।
आज भी उन पलों को याद कर हम मुस्कुराते है,
आज भी उन बाहों की गर्मी की आहट याद कर हम तड़प उठते है।
तड़प यह मेरी वो मिटा दे,
ए जिन्दगी, अब उनसे हमे मिलवा दे।
in loveeee😍
ReplyDeletefinallyyy you posted this
ReplyDeletemy all time fav💗
ReplyDeleteवो रातें!❤️
ReplyDeletetell me this is based on our 2016 trip pleasee😭
ReplyDeletefav fav fav✨
ReplyDeleteतड़प यह मेरी वो मिटा दे,
ReplyDeleteए जिन्दगी, अब उनसे हमे मिलवा दे।
LOVE LOVE THESE LINES😭❤️
every line feels so good
ReplyDelete😍❤️
ReplyDeletefav hindi poetry so far😍
ReplyDeletewill never get bored of your hindi kavitayein🥹🥰
ReplyDeleteसदियों की कमी शायद आज पूरी हुई है।
ReplyDeletesuch a good starting verse🙌💗