मन👀
आज मन को एक दर सा लग रहा है,
दर तुझसे, दर खुदसे।
आज मन ज़रा खोया सा लग रहा है,
खोया राह से, खोया राह में।
आज मन में एक पीड़ा सी हो रही है,
पीड़ा घाव की, पीड़ा चाव की।
आज मन को याद सी आ रही है,
याद उन दिनों की, याद उन लोगो की।
आज मन विचलित सा हो रखा है,
विचलित इन हवाओं से, विचलित इन कर्मो से।
आज मन को क्रोध सा आ रहा है,
क्रोध उस रात का, क्रोध उस बात का।
आज सभी विकारों ने मेरे मन को अपना घर सा बना लिया है,
आज सभी खुशियों ने मेरे हृदय से मुंह सा बना लिया है।
चाहा तो हमने भी बहुत उनको मनाना,
चाहा तो हमने भी उनको रोज भूलना।
याद शायद उन्हें भी तो आती होगी?
चुप्पी मेरी उनको भी तो सताती होगी?
दुर रहकर भी पास जाने की कोशिश की बहुत हमने,
पर दुर रहकर दूर ही रहना सिखाया उन्होंने।
sooo gooddd🥺
ReplyDelete❤️❤️
ReplyDelete😍🎀
ReplyDeletegood hindi😍
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